चंद्रशेखर आज़ाद

जिनके मुह से राष्ट्र भक्ति के पुष्प हमेशा झड़ते थे जिनकी मधुरम वाणी के स्वर सबकी पीड़ा हरते थे जिनकी युगों युगों तक है मिट सकती नही निशानी ऐसे वीर महापुरुषो की सुन लो आज कहानी वो सारे रिश्ते भूल गए हंस कर फांसी पर झूल गई

माँ की लाज बचाने को कुम्हला सभी वो फूल गए जब जाने बहुत गवाई थी सीने पर गोली खाई थी तब जाकर भारत माता को आज़ादी मिल पाई थी चूम लिया फांसी का फंदा भगत सिंह ने हंस कर के था उसने जीवन बन्धन तोड़ा मात्र भूमि के वन्दन में

 

जब अंग्रजो की त्राही त्राही से भारत भूमि रोइ थी खुदको तब असहाय समझ वीरो की शक्ति सोई थी भारत माँ की देख व्यथा क्रंदन करती हर छाती थी आज़ाद करो आज़ाद करो हर ओर ध्वनी ये आती थी समय चक्र कुछ ऐसा घूमा हुआ अचानक चमत्कार

लिया कोख से जगरानी की श्री शेखर ने अवतार छोडी शिक्षा घर को भूले ऐसी निष्ठा जागी थी संकल्प लिया था देश प्रेम का ऐशौर्य सम्पदा त्यागी थी दंड मिला पँद्रह कोड़ो का किन्तु नहीं घबराया था बिस्मिल का आशीष साथ ले आगे कदम बढ़ाया था

एक योजना बड़ी बनाकर फिर काकोरी कांड किया अंग्रजो के मुह पर सबने कड़ा तमाचा मार दिया हिल गई इससे ब्रिटिश हुकूमत खिसिया कर ये कदम उठाया भारत के तीनों वीरो को उसने फांसी पर लटकाया इस दर्द विदारक घटना से पूरा भारत चीत्कार उठा

आज़ाद चंद्रशेखर का ह्रदय अंगेजो पर हुंकार उठा माटी का तिलक लगा माथे पे बना क्रांति का मतवाला अंगेजो के प्रति फूट पड़ी फिर उसकी रग रग से ज्वाला अशफ़ाक़ उल्लरा जेन्द्र लाहड़ी की यादें तड़पाती थी बिस्मिल जी से की गई पर प्रतिज्ञा कानो से टकराती थी

उसने ये वचन दिया था मै लड़ते लड़ते मर जाऊंगा बिस्मिल जी तुमसे वादा है अंग्रजो हाँथ न आऊंगा शेखर जी को इस भारत में केवल आज़ादी लानी थी अंग्रेजो ने भी उन्हें मारने की बस मन मे ठानी थी अलफ्रेट पार्कमेइक दिन फिर मुठभेड़ हो गोरों की

दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए शामत आ गई थी चोरो की लेकिन उनके रिवाल्वर मे जब अंतिम गोली शेष बची शेखर ने उसकी नली मोड़ फिर अपनी कनपटी रखी भारत माँ तुम्हे नमन शतशत नमन बिस्मल जी मै भी आता हूँ अंग्रेजों हाँथ न आऊंगा ये वादा आज निभाता हूँ

इतना सोंचा फिर हांथो की आँगुली से दाब दिया था ट्रिगर वादा पूरा कर निकल गऐ देखो हो गई आज़ाद अमर

<strong>ओज कवि </strong>

<strong>प्रांजुल अस्थाना</strong>

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